आखिर जिम्मेदार कौन ?



जी हां ये तस्वीर हमारे आगरा की ही है ।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत पहले से आज समूचे भारत में स्वच्छता आई है लेकिन जहां एक तरफ सड़कों को साफ-सुथरा देख तिनका भर भी फेंकने के लिए ज़मीर गवारा नहीं‌ करता वहीं कुछ साथी भाई -बहन को जगह-जगह गंदगी करते देख शर्म से आंखें नीचे हो जाती हैं।


बहुत आसान है सरकार और कर्मचारी वर्ग पर उनके काम को लेकर टिप्पणी करना लेकिन उससे पहले ये सोचना भी जरूरी है कि हम कहां जिम्मेदार है ।
यह तस्वीर चार बड़ी बातों की ओर इशारा करती नज़र आ रही है ।
1- कूड़ेदान होने के वावजूद भी जमीन पर फैला कचरा
जिम्मेदार कौन सरकार या आप ?
2- बेजुबान जानवरों की जान को खतरा ,चारों तरफ पौलिथिन ही पौलिथिन। जिम्मेदार कौन ?
3-एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान की ओर अग्रसर है और जबकि जनता कचरा फैलाने में। आखिर जिम्मेदार कौन आप या सरकार।
4-उत्तर प्रदेश में गायों की सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फरमान जारी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग कर जिला अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गायों को सड़कों पर बेसहारा छोड़ने वाले गौ पालकों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए तो फिर ये गायों को आवारा छोड़ने वाला कौन ?
एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्त्तव्यों को भी समझने का प्रयास करें और यदि आपके सामने इस तरह की गतिविधियां आती हैं तो आप लोगों को भी आगाह करें ।

अपराजिता (तेरा सफर)




हुआ करता था जिनका कभी शोषण,
आज कंधे से कंधा मिलाए हुए हैं।
न थी जिन्हें, कभी घर से निकलने तक की आजादी,
आज उनकी उड़ान देख, दुश्मन के कदम डगमगाए हुए हैं।
गर्वान्वित होती है हर नारी , देखकर देश का ऐसा गौरव
जब देश की गौरवशाली एक परेड में ,
अपराजिता का अनुसरण करते हैं नौजवान भाई,
देखकर देश का ऐसा दृश्य;
चमक उठती हैं मेरी आंखें,
उनके ज़ज्बे को सलाम करती हैं,मेरी सांसें
कितना हौसला मिलता है हमें इनसे;
कि कुछ कर सके इस जहां में,
समझ सकती हूं आज भी कई घरों में,
होती हैं; लड़कियों के पैरों में जंजीरें,
जिससे कुछ करने की चाहत में भी
कुछ न कर पाने से उठती है पीड़ा,
मानसिक वेदना ही है उस अपराजिता की,
निवेदन है उनके परिजनों से,
कोशिश करो समझने की उनकी वो पीड़ा,
जो वो वर्षों से सहती चली आ रही हैं,
नाम दिया है आपने सम्मान की बात है लेकिन,
पहचान हमारी खुद की होनी चाहिए,
स्वावलंबी होने की सीख घर- घर तक होनी चाहिए।
जीने का मौका दे उसे, खुले आसमां तले
एक दिन जरूर वो चिड़िया बन उड़कर दिखलाएगी।
तूफानों का सामना कर वो घर वापस लौट जरूर आएगी।
मत हो तुम मानसिक और शारीरिक वेदना का शिकार,
तुम्हें रखना है अपना स्वाभिमान बरकरार ,
यही चेतना हमें अब आगे तक पहुंचानी है,
"अपराजिता" क्योंकि ये तेरी कहानी है।

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