आत्मचिंतन (मन की बात )

 बेटी मेरा अभिमान को लेकर कुछ पंक्तियां गुन रही थी । हर दिन एक नया मोड़ देने की लालसा में दिन रात जग रही थी। पिरो ली थी जब मैंने लिखने की वो हर बात अपनी उसी समय अचानक एक जघन्य वारदात फिर घट चुकी थी । क्या हुआ , क्या नहीं , पर हालात उसके सब बयां कर रहे थे । फिर भी न जाने क्यों मौन ने अपनी एक जगह बना ली थी। राजनीति है या सच्चाई या मन का बुना कोई फसाना पर एक बेटी की इस तरह की विदाई के लिए मां बाप बेटी का अभिमान न बन सके। उसके तुरंत बाद दो और घटनाएं और आ चुकीं थीं।क्या बीती होगी उन पर जब अपनी आंखों के सामने लावारिश सा अंतिम संस्कार देखा होगा। क्या बीती होगी उस हर बेटी के मां बाप पर जो आज भी अपनी बेटियों को पढ़ा रहे हैं और बचाने की जद्दोजहद में भी लगे हैं।बेटियों को जातिवाद से मत जोड़िए जिन्हें बचपन से ही पराए घर का समझा जाता है और फिर शादी के बाद भी यह एहसास कराया जाता है कि तुम दूसरे घर से आई हो । तो फिर आज एक बेटी की हत्या को आप जाति से कैसे जोड़ सकते हो जबकि उसका कोई घर ही नहीं होता तो धर्म और जाति की फिर बात ही क्यूं की जा रही है।खैर इंसाफ से परिवार के लिए बेटी की कमी पूरी नहीं हो सकती लेकिन जिसने गलत किया है उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए। जो लोग मां बाप को ग़लत ठहराते हैं समझ लीजिए यूं ही बेटियों पर अंकुश नहीं लगाए जाते जब चुनौती हो सामने तो मजबूरन खुद को ही आगे बढ़ना पड़ता है।अगर मां बाप अंकुश लगाएं तो‌ गलत न समझना दौर ही कुछ ऐसा है‌ कि बेटी पढ़ाना भी जरूरी है और बचाना भी जरूरी है।

मानवता हुई शर्मसार : गर्भवती हथिनी को खिलाया पटाखे भरा अनानास

प्रधानमंत्री मोदी ने लिया तैयारियों का जायजा : सुरक्षा के कड़े प्रबंध ।

मुंबई शहर, ठाणे, पालघर , रायगढ़ रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में हाई अलर्ट जारी।

भारतीय मौसम विभाग द्वारा मंगलवार को दी जानकारी के अनुसार चक्रवाती तूफ़ान 'निसर्ग' 3 जून यानि कि आज की शाम को उत्तरी महाराष्ट्र और दक्षिणी गुजरात के समुद्री तट से टकराएगा। इससे सुरक्षा के लिए राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

माना जा रहा है कि अरब सागर में हवा के प्रेशर में बदलाव होने के कारण चक्रवात 'निसर्ग' ने भयंकर रूप ले लिया है। हालांकि यह एम्फन से कम ताकतवर होगा ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।सूत्रों के हिसाब से आज दोपहर 1 से 4 बजे के बीच मुंबई से लगभग 94 किमी दूर हरिहरेश्वर और दमन के पास अलीबाग में आज दोपहर जमीन से टकराएगा।उस समय मुंबई, ठाणे और रायगढ़ जिलों में हवा की रफ्तार 100 से 120 किमी /घंटे तक हो सकती है। अभी ये तूफ़ान मुंबई से‌ लगभग 100 किमी दूर है। इस तूफ़ान के आने से बड़े स्तर पर तबाही होने के अनुमान हैं । ये सामान्य ज्वर की तादैत में एक से दो मीटर ज्यादा ऊंचाई का होगा। निकले क्षेत्र जलमग्न हो जाएंगे। भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केंद्रीय जल आयोग का अनुमान है कि ठाणे, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग,पालघर, मुंबई और नासिक में भारी बाढ़ आ सकती है।

 

ऐसे में क्या सरकार ने राज्यों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम किए हैं

 

बिल्कुल सरकार इस तूफ़ान को लेकर सतर्क है। महाराष्ट्र, गुजरात, केन्द्र शासित राज्य दमन व दीयू और‌ दादर नगर हवेली में लोगों की सुरक्षा में कड़े इंतजामात किए गए हैं। चक्रवात निसर्ग को देखते हुए NDRF( National , Desaster Response Force) की 20 टीमें  आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से महाराष्ट्र पहुंच गईं हैं।

·         NDRF  के महानिदेशक ने  8 टीमें  मुंबई में , रायगढ़ में 5 टीमें , पालघर में 2 टीमें और ठाणे में 2 टीमें , रत्नागिरी में 2 टीमें और सिंधुदुर्ग में 1 टीम , राहत और बचाव काम के लिए मुस्तैद की गई  है।

·         तूफ़ान के मद्देनजर पश्चिम नौसेना कमान ने सभी टीमों को सतर्क कर दिया है।नौसेना ने 5 बाढ़ टीम और 3 गोताखोर टीमों को मुंबई में तैयार रखा है। गुजरात में 16 टीमों को भेजा गया है। यहां के तटीय जिलों में 80 हजार लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जा चुका है।

·         दोनों राज्यों के‌ कुल 11 जिलों में हाई अलर्ट है।

·         मछुआरों को 4 जून तक समुद्र में जाने से रोका गया है।

·         समुद्र के तटीय क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।


·         एनडीआरएफ और ‌पुलिस नवसारी जिले के मेंढर और‌ भाट गांवों से लोगों को सुरक्षित करने के लिए निकाल‌ रही है। पालघर जिले के गांवों से 21000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। सभी कारखानों और बाजारों को बंद रखा गया है।


·         अभी तक मुंबई से 50 उड़ानों की आवाजाही थी। लेकिन अब 19 उड़ानों की आवाजाही होगी। इसमें से 11 जाने वाली है 8 आने वाली हैं। इंडिगो एयरलाइंस ने आज मुंबई से आवागमन की 17 फ्लाइट रद्द कर दी हैं । हो‌ सकता आगे इनमें बदलाव देखने को मिले। मुंबई से चलने वाली 5 ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया गया है।

·         मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य के‌ लोगों से दो दिन तक घरों में रहने की गुजारिश की।

 

 यह वीडियो रत्नागिरी का है।रत्नागिरी में तेज़ आंधी और बारिश शुरू।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की गई तैयारियों का जायजा लिया है। उन्होने गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर उन्हें मदद का आश्वासन दिया है। उनके द्वारा‌ ट्वीट किया गया है- भारत के पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में चक्रवात की स्थिति का जायजा लिया। मैं सभी की कुशलता के लिए प्रार्थना करता हूं। लोगों से हर संभव सावधानी और सुरक्षा उपाय बरतने का आग्रह भी करता हूं।

इस तरह मुंबई के 6 बीचों मे करीब 93 लाइफगार्ड तैनात किए गए हैं। बीएमसी ने 35 स्कूलों को अस्थायी शेल्टर के रूप में बदल दिया है। तटीय इलाके से लोगों को लाकर यहां पर शरण दी जा रही है।

 

लोकडाउन ने छीना बच्चे से मां का आंचल ....

कोरोना ने बहुत कुछ छीना और आज भी हम लोकडाउन से जूझ रहे हैं । न जाने कितने गरीब श्रमिकों की मौत हुई और न जाने कितने परिवारों ने खोया अपनों को ।  खेल रहा है वो मां का आंचल समझ कर , नादान है वो क्या जाने जिंदगी और मौत क्या है?? इसे तो ये भी नहीं पता मां का आंचल अब कफ़न में तब्दील हो चुका है और मौत की नींद में सो गई है इसकी मां । जी हां चार दिन भूखे प्यासे ट्रेन में सफ़र कर हमेशा के लिए मौत की नींद में सो चुकी है इन नन्हें बच्चों की मां ।

बहुत ही दुखद है ये घटना ।
आखिर कौन है जिम्मेदार इन बच्चों से उनकी मां का आंचल छीनने का?????
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प्रवासी मजदूरों की वापसी से अपने राज्य लौट रहा है हुनर

प्रवासी मजदूरों की वापसी से अपने राज्य लौट रहा है हुनर

मजदूरों के रूप में हुनर लौट रहा अपने राज्य
आज मजदूर अपने राज्य वापस लौट रहे हैं।इतनी अधिक मात्रा में आने वाले‌ मजदूर आज चिंता का विषय बने हुए है।
कैसे होगा इनका जीवन यापन जबकि ये तो अपने राज्य से दूसरे राज्यों में नौकरी की तलाश में गए थे।तो अब कैसे एकदम से इन्हें रोज़गार मिल पाएगा । ऐसे सवाल आज हर किसी के मन में चल रहे हैं ।

क्या आपने सोचा कि अभी जो आर्थिक पैकेज राज्य सरकारों के लिए घोषित किया गया । ये सच में किसके लिए है । दरअसल आपको बता दें कि ये पैकेज इन्ही मजदूरों के लिए है जो पूंजीपतियों के द्वारा शुरु किए व्यापार को अपने हुनर से शुरू करेंगें और अपना बेहतर भविष्य कर सकेंगें । इस तरह राज्य सरकारों द्वारा एक उज्जवल राज्य की स्थापना करना मुमकिन हो सकेगा। मजदूर किसी भी व्यापार के लिए आधारशिला हैं । इनके बिना व्यापार चला पाना मुश्किल है।आज सभी मुश्किल हालातों में हैं चाहे वो कोई व्यापारी हो या मजदूर । आगे आप बिल्कुल देखेगें कि यही मजदूर और व्यापारी मिलकर एक उन्नत राज्य बना सकेंगें‌।

लॉकडाउन से टूटा मजदूरों पर कहर

आज सब अपने घरों में हैं सिवाए कोरोना योद्धाओं, जैसे हमारे डॉक्टर्स , पुलिस कर्मी , बैंक कर्मी आदि या फिर प्रवासी मजदूर। लेकिन आज मुझे दर्द उन मज़बूर मजदूरों के लिए हो रहा है जिनके बिना उन घरों का निर्माण मुश्किल है जिन घरों में हम सब रहते हैं।

लेकिन सिर्फ एक  आशियाने का दुख जताना मेरा उद्देश्य नहीं । क्यूंकि उनके लिये आशियाने न पहले कभी थे ,न आज मिलने की उम्मीद है।
दुख तो इस बात का है कि ये मजदूर भूखे प्यासे दर-बदर फिर रहे हैं, जिसकी वजह कोई तो है।
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हर रोज़ सुबह उठकर जैसे ही टीवी पर रिमोट से न्यूज़ चैनल लगाते हैं या मोबाइल उठाकर देखते हैं, तो एक ही खबर दुख से  सराबोर कर देती है फलां जगह पर इतने मजदूर ट्रेन से कट गए या पैदल चलते हुए जा रहे मजदूरों को कोई वाहन टक्कर मार गया या आज ही का केस ले लेते हैं, यूपी औरैय्या के एक गांव में पलायन करने वाले मजदूर चाय पीने के लिए रुके, एक ओर‌ से तेज़ गाड़ी आई और इस घटना ने 24 मजदूरों की जानें ले ली। दिल दहल जाता है उन बेसहारा मजदूरों को ऐसी घटनाओं का शिकार होते देखकर।
अभी भी न जाने कितने मजदूर घर वापसी के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। हाथों में नन्हें बच्चों को लेकर मां पैदल चलती चली जा रही हैं।

 एक दृश्य तो ऐसा दिखा कि मैं खुद को भावुक होने से रोक ही नहीं पाई। उस वीडियो में एक मजदूर अपने परिवार को लेकर बैलगाड़ी से जा रहा था रास्ते में एक बैल ने दम तोड़ दिया, तो बेचारा खुद उस बैल के स्थान पर लग गया ताकि उसका परिवार घर तक सही सलामत पहुँच सके। 
अगर इन्हें सारी सुविधाएं मिल रही होतीं तो भला कौन चाहता है इस दुनिया में एक जानवर सी जिंदगी जीना । 
एक मां ने अपने बच्चों को सड़क पर ही आशियाना बनाकर सुलाया तो किसी ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया। कितना मजबूर रहा होगा वो पिता और कितनी असहाय रही होगी वो मां । 
   

कभी-कभी ये ऊंचे स्तर के लोग एहसास दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते कि गरीबों की कीमत होती तो है लेकिन सिर्फ वोट बटोरने में। क्यूंकि इनके जितना कोई मासूम नहीं। हम और आप तो अपने मन की बात छुपा लेते हैं लेकिन इनसे कोई अगर एक बार प्यार से बात करे तो ये अपनी पूरी व्यथा-कथा सुना देते हैं। 
क्या यही अच्छे दिन आने वाले थे। काश ! अगर सही योजना रही होती और एक वार प्रवासी मजदूरों के बारें में पहले सोच विचार कर लिया जाता तो आज दुर्घटना में दुनिया छोड़कर जाने वाले सारे मजदूर भाई-बहन जीवित होते।
ये अगर आज जीवित ही नहीं रहेंगें तो कल के लिए आर्थिक पैकेज और फिर 12 घण्टे की नौकरी का बोझ किस पर डाल सकेंगे आप । 
अभी भी चाहें राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार, दोनों ही इन मासूमों की जिंदगी को बेहतर तरीके से बचाने का विचार कर सकती हैं।

We are thankful to all Corona Warriors

Today we are not in good condition. All of us are struggling with Corona Pandemic.But somewhere is here to take care of us socially, financially and healthily. Yes I am talking about doctors, bankers, Police administration & Cleaning workers. 
A small thanx to those from my side.
 

Aarogya Setu App: A bullet proof jacket for us

Aarogya Setu App is giving us essential services for betterment of conditions which are around us just because of Covid- 19. We all know about this, it is dangerous epidemic disease.

So if this app available for us and capable to find risks then why we are waiting  ..... This time is is our duty to download this app , make your family safe & Save our India. Go to your phone play store and enter aarogya Setu ....within 3 mb we install it.


 Arogya Setu defined itself as :-

"GOI’s app to connect health services with the people of India to fight COVID-19

Aarogya Setu is a mobile application developed by the Government of India to connect essential health services with the people of India in our combined fight against COVID-19. The App is aimed at augmenting the initiatives of the Government of India, particularly the Department of Health, in proactively reaching out to and informing the users of the app regarding risks, best practices and relevant advisories pertaining to the containment of COVID-19."

It has feature of your status , self assess,  Covid- updates  and e- pass also . It can track your location. Bluetooth will open .Do and don't also available to guide us . If you wanna check your status you can fill some questions honestly they will get response as what is your health status right now , you are safe or not .

ArogyaSetuapp#Download it guys plzz plzz plzz🙏🙏🙏🙏 ..every one knows we are Corona Warriers So it will work as bullet proof jacket for us... Wash ur hands  again and again, use Sanetizer ,Stay safe & fight against Covid- 19 which is looking as a Combat.

One prank extinguished the flame of friendship

I was not in happy mood. It seemed like still pain had not settled down. Conditions are not in my favour. I thought I would talk to my best friend today. We were talking that then an unknown call I received but he said ,"tumhara baap bol rha hoon" in loud sound . Oh my god I scared badly because my father was at home. Who is he ? It was very terrible to me after all I didn't know who is he. Lots of messages suddenly started coming from an unknown number and yes it was that number which was used to call me .In messege I saw he said that call me and then I will introduce myself to uhh. Nobody had ever talked to me like this before. It was about 10 o' clock in the night. There was not even much relaxation in my house that I could receive someone's call at any time. So I messaged the number to my best friend and said, know who he is. Threatening me to that when you come to college then tell you who I am. After sometime my friend messaged me and said he cut the call of mine without response. Repeated messages were coming from that unknown number. Even I called once, but no one spoke on the call. It was getting late at night and it seemed as he was enjoying it by making me scared. At that time, my friends also suspected.Whatever message I was sending to my friend, he (unknown no.)was sending me. It seemed as my mobile had been hacked. Finally I got upset and told this at home. We treat him like cybercrime, he has already told that he is my best friend with whom I was talking and asking for help.


Nothing we did against him because he was just enjoying. He was kidding. He did not hack anything. But yes it is true he had lost his life long friendship .
Prank is necessary to make life happier but not this type. Eventually this incident killed off a beautiful friendship relationship.

मानवता सर्वोपरि...... धर्म की आड़ में मानवता न खोएं


कोरोना वायरस ने देश में कहर ढा रखा है। वहीं धर्म के आधार पर अपनी-अपनी विचारधाराओं का प्रचार किया जा रहा है और इस दौरान इंसान जो कि एक जैविक खतरा बन गया है । एक दूसरे को ऐसे समय में छूना या एक साथ कई सारे लोगों का एक ही जगह पर रहना घातक हो चुका है।सरकार निवेदन करती दिख रही है बार-बार घर पर रहने के लिए। और क्यूं न हमें सूचित करें ये हमारे लिए और देश दोनों के लिए जरूरी है ।
एक तरफ यह तस्वीर जिसे देख हृदय द्रवित हो जाता है कि
कैसे डॉक्टर्स ड्यूटी कर रहे हैं मुश्किल घड़ी में।


और‌ वहीं दूसरी तरफ पुलिस और डॉक्टर्स पर थूकना उनसे हुई झड़प हमें नफ़रत की ओर ढकेल देती है। 

इससे और आगे की बात करूं तो अब तो स्टाफ नर्ससेज् के सूचना पत्र से मानसिकता से बीमार चंद लोगों के अश्लीलता के भी प्रमाण मिलने लगे हैं।

मुलगता है हमारा सिर्फ किसी भी धर्म का पक्षधर होना सही नहीं। अभी इस समय देश के हालात ऐसे नहीं कि हम सिर्फ नमाज़ अदा करने जैसे मुद्दों पर एक दूसरे पर सवाल-जवाब लादें। ऐसी स्थिति में शायद आप एक नागरिक होने का कर्त्तव्य निभाते तो वो भी नमाज़ से कम न होता। सही और ग़लत करने वाले हर धर्म में मौजूद हैं। लेकिन बड़ा वो है जो मानवता को अपना धर्म समझकर कर्त्तव्य पथ पर सदैव अग्रसर रहता है।

ध्यान से देखिएगा ये नेकी और‌ पत्थर दोनों एक ही धर्म से हैं।तो ये तय है कि मज़हब कोई भी दुश्मनी करना नहीं सिखाता। ईश्वर ने तो हमें इंसान बनाकर भेजा है मज़हबी तो हम धरती पर आकर हुए इसलिए हमारा पहला धर्म मानवता है। और जब ये संसार छोड़कर जाएंगे तो ईश्वर आपसे धर्म नहीं आपका कर्म और कर्तव्य के आधार पर आपको आकेंगे।

सलाम रजिया बेगम मंसूरी जी जैसी वीरांगनाओं को।🙏

अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है तो दिया जलाना है

प्रधानमंत्री जी का संदेश आज पालन करने का दिन आ गया है। जहां कुछ मूर्ख लोग जमकर मजाक बना रहे हैं बिना सत्यता जाने । उनकी मूर्खता को चुनौती देते हुए कहना चाहती हूं हम तो दिए जलाएंगे।
ॐ असतो मा सद्गमय,
तमसो मा ज्योतिर्गमय,
मॄत्योर्मा अमॄतं गमय।


और देश का हर एक नागरिक दिया जलाएगा ।
जैसे आपने 22 मार्च को एक साथ कर्मवीरों का आभार व्यक्त करके एकता का प्रमाण दिया था। उसी प्रकार 5 अप्रैल दिन रविवार रात 9 बजे ,9मिनट के लिए लाइट बंद करके; मोमबत्ती, दिया या फ्लैस लाइट से खिड़की पर या दरवाजे पर खड़े होकर प्रकाश फैलाना है और इस महामारी से लड़कर इसे भगाना है।


सोशल डिस्टेंसिंग़ की लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करना है।



हम सब को ये करके दिखाना है कि हम सब एक साथ हैं।

कुछ पल अकेले में मां भारती का ध्यान करें और 130 करोड़ की आबादी के चेहरे का स्मरण करें।इस आयोजन में इकट्ठा नहीं होना है। कोई भी लक्ष्य‌ नामुमकिन नहीं।

पोजिटिविटी का प्रतीक है रोशनी। मुश्किल घड़ी में भी पोजिटिव रह पाना आसान काम नहीं। स्वीकार करेंगे अगर आप उनका अनुरोध शायद खुद में एक नया जोश पाएंगें।

याद रहे कि सेनेटाइजर यूज करके दिया न जलाएं उसमें एल्कोहल होता है आप जल सकते हैं।कोई भी कार्य उचित सावधानी के साथ करें। कृपया सावधानी बरतें।



जय हिंद।।🇮


कविता (नदी)


नज़ारा स्वच्छ नदी का ।
लुभाता मन सभी का ।
तट बैठूं मैं इसके ,
मिलता सुकूं सदी का।

हिमालय की नदियां,
हैं बारहमासी ।
बने भगवान खुद ही,
जमुना तट वासी।

शिव की जटा से बहती,
गंगा की अमृत धारा।
हरि की पौड़ी घाट का,
दिखता रूप न्यारा ।

ओझल न हो पाएं ,
ऐसे सुंदर नज़ारे।
अपनी एकाग्रता को ,
इनकी स्वच्छता पर लगा दें।

ज्यादा अच्छा होना शायद आज गलत है

आप कहानी समझें या अनैतिक व्यवहार का साझा करना , समझना आपको ही है।
आज कल हम और आप हम सभी जानते हैं कि ट्यूशन पढ़वाना अब कितना आवश्यक हो गया है।

इस दौर में ट्यूशन फीस कहीं ऐसा न हो माता -पिता देने से इंकार कर दें या मनमानी रुपये काट लें , इसी डर से अध्यापकों ने एडवांस पेमेंट लेना स्टार्ट कर‌ दिया। लेकिन आज भी कुछ शिक्षक नहीं चाहते कि एडवांस पेमेंट न दे पाने की वजह से बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएं। और अपनी इस अच्छाई की वजह से वो महीनें भर बच्चों को पढ़ाते हैं तब जाकर उनको पेमेंट मिलता है।

आज मैं जो कहानी बताने जा रही हूं ये भी एक ऐसे ही अध्यापक की है ।
जो 4 साल तक बच्चों को लगातार पढ़ाते रहे । कभी खुद ट्यूशन के पैसे महीना पूरा होने पर भी नहीं मांगें। जब माता-पिता को याद आ गया उन्होंने खुद से ही दे दिए।लेकिन अब जब लाकडाउन का समय आया तो न‌ तो महीना पूरा हो पाया और न मिले वो रुपए जो महीने के अंत में मिला करते थे। डिजिटल इंडिया हो जाए मुहिम तो चल रही है लेकिन फोलो कितने लोग करते हैं जबकि जरुरत है ऐसा करने की । लेकिन न देने वालों के लिए खुले हैं हजारों बहानों के दरवाजे।

जब खुद से टीचर ने 15 दिन बाद मैसेज करके बोला तो तिलमिला उठे माता -पिता और फिर क्या था फटाक से कॉल किया अध्यापक को ।अध्यापक जानता था कि सवाल-जवाब तो करने पड़ेंगे मेरी मेहनत की कमाई है । बिना रविवार शनिवार देखें इस महीने मैंने 18 दिन तक लगातार पढ़ाया है । उसने तुरंत जो भी जबाव आए सबका जबाव दिया लेकिन जहां बात 18 दिन के पेमेंट की थी वो 12 या 15 दिन के पेमेंट में सिमट के रह गई। 4 साल का घर जैसा व्यवहार चकनाचूर सा हो गया। इस महीने की छुट्टी तो थी नहीं तो बाकी पूरे साल की छुट्टियां गिनवा दी गईं।इस समय जबकि सब बंद है । हम एक भयानक महामारी से लड़ रहे हैं । हजारों लाखों रुपए जहां दानी पुण्यात्मा गरीबों के खाने में खर्च कर रहे हैं वहीं कहां ऐसी तुच्छ मानसिकता। अच्छाई का ये सिला होगा भला कौन जानता था। आशा करती हूं ऐसा और किसी के साथ न हो।





मन की बातों से मुश्किल घड़ी में भी कोशिश करते हैं हमें थामे रखने की हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी

प्रधानमंत्री जी की मन की बातों में से कुछ चुनिंदा बातें मुझे बहुत ज्यादा अच्छी लगी :-


1. सोशल डिस्टेंसिंग़ बनाना जरूरी है लेकिन इमोशनल या ह्यूमन डिस्टेंस न बनाएं क्यूंकि कोरोना होना कोई जुर्म नहीं है ऐसे लोगों को, जो जूझ रहे हैं इस समस्या से ,कृपया घृणा की दृष्टि से न देखें।
2. गरीबों से क्षमा याचना , क्यूंकि प्रधानमंत्री जी जानते हैं कि सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना उन्हें ही करना पड़‌ रहा है।
3.उन्होनें कहा कि मैनें आपको घर के बाहर झांकने के लिए जरूर मना किया है लेकिन आप अपने मन के भीतर झांककर देखें और समय का सदुपयोग करें ।
4. डॉक्टर्स जिन्हें भगवान का दर्जा दिया जाता है कहीं न कहीं आज ये सच भी आप सभी देख ही रहें हैं कि विषम परिस्थितियों में ये हमारा साथ दे रहे हैं। बहुत-बहुत आभार देकर उन्हें प्रोत्साहित किया।
5.एक और आखिरी बात जिसमें उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में आपको समय मिला है अपनों के साथ रहने का और अपनी रूचि को जानने का तो उन रूचियों पर अपना समय जरूर दें।

जय हिंद!!🇮🇳

आखिर जिम्मेदार कौन ?



जी हां ये तस्वीर हमारे आगरा की ही है ।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत पहले से आज समूचे भारत में स्वच्छता आई है लेकिन जहां एक तरफ सड़कों को साफ-सुथरा देख तिनका भर भी फेंकने के लिए ज़मीर गवारा नहीं‌ करता वहीं कुछ साथी भाई -बहन को जगह-जगह गंदगी करते देख शर्म से आंखें नीचे हो जाती हैं।


बहुत आसान है सरकार और कर्मचारी वर्ग पर उनके काम को लेकर टिप्पणी करना लेकिन उससे पहले ये सोचना भी जरूरी है कि हम कहां जिम्मेदार है ।
यह तस्वीर चार बड़ी बातों की ओर इशारा करती नज़र आ रही है ।
1- कूड़ेदान होने के वावजूद भी जमीन पर फैला कचरा
जिम्मेदार कौन सरकार या आप ?
2- बेजुबान जानवरों की जान को खतरा ,चारों तरफ पौलिथिन ही पौलिथिन। जिम्मेदार कौन ?
3-एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान की ओर अग्रसर है और जबकि जनता कचरा फैलाने में। आखिर जिम्मेदार कौन आप या सरकार।
4-उत्तर प्रदेश में गायों की सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फरमान जारी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग कर जिला अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गायों को सड़कों पर बेसहारा छोड़ने वाले गौ पालकों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए तो फिर ये गायों को आवारा छोड़ने वाला कौन ?
एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्त्तव्यों को भी समझने का प्रयास करें और यदि आपके सामने इस तरह की गतिविधियां आती हैं तो आप लोगों को भी आगाह करें ।

अपराजिता (तेरा सफर)




हुआ करता था जिनका कभी शोषण,
आज कंधे से कंधा मिलाए हुए हैं।
न थी जिन्हें, कभी घर से निकलने तक की आजादी,
आज उनकी उड़ान देख, दुश्मन के कदम डगमगाए हुए हैं।
गर्वान्वित होती है हर नारी , देखकर देश का ऐसा गौरव
जब देश की गौरवशाली एक परेड में ,
अपराजिता का अनुसरण करते हैं नौजवान भाई,
देखकर देश का ऐसा दृश्य;
चमक उठती हैं मेरी आंखें,
उनके ज़ज्बे को सलाम करती हैं,मेरी सांसें
कितना हौसला मिलता है हमें इनसे;
कि कुछ कर सके इस जहां में,
समझ सकती हूं आज भी कई घरों में,
होती हैं; लड़कियों के पैरों में जंजीरें,
जिससे कुछ करने की चाहत में भी
कुछ न कर पाने से उठती है पीड़ा,
मानसिक वेदना ही है उस अपराजिता की,
निवेदन है उनके परिजनों से,
कोशिश करो समझने की उनकी वो पीड़ा,
जो वो वर्षों से सहती चली आ रही हैं,
नाम दिया है आपने सम्मान की बात है लेकिन,
पहचान हमारी खुद की होनी चाहिए,
स्वावलंबी होने की सीख घर- घर तक होनी चाहिए।
जीने का मौका दे उसे, खुले आसमां तले
एक दिन जरूर वो चिड़िया बन उड़कर दिखलाएगी।
तूफानों का सामना कर वो घर वापस लौट जरूर आएगी।
मत हो तुम मानसिक और शारीरिक वेदना का शिकार,
तुम्हें रखना है अपना स्वाभिमान बरकरार ,
यही चेतना हमें अब आगे तक पहुंचानी है,
"अपराजिता" क्योंकि ये तेरी कहानी है।

आत्मचिंतन (मन की बात )

 बेटी मेरा अभिमान को लेकर कुछ पंक्तियां गुन रही थी । हर दिन एक नया मोड़ देने की लालसा में दिन रात जग रही थी। पिरो ली थी जब मैंने लिखने की वो...