कोरोना वायरस ने देश में कहर ढा रखा है। वहीं धर्म के आधार पर अपनी-अपनी विचारधाराओं का प्रचार किया जा रहा है और इस दौरान इंसान जो कि एक जैविक खतरा बन गया है । एक दूसरे को ऐसे समय में छूना या एक साथ कई सारे लोगों का एक ही जगह पर रहना घातक हो चुका है।सरकार निवेदन करती दिख रही है बार-बार घर पर रहने के लिए। और क्यूं न हमें सूचित करें ये हमारे लिए और देश दोनों के लिए जरूरी है ।
एक तरफ यह तस्वीर जिसे देख हृदय द्रवित हो जाता है कि
कैसे डॉक्टर्स ड्यूटी कर रहे हैं मुश्किल घड़ी में।

और वहीं दूसरी तरफ पुलिस और डॉक्टर्स पर थूकना उनसे हुई झड़प हमें नफ़रत की ओर ढकेल देती है।

इससे और आगे की बात करूं तो अब तो स्टाफ नर्ससेज् के सूचना पत्र से मानसिकता से बीमार चंद लोगों के अश्लीलता के भी प्रमाण मिलने लगे हैं।
मुलगता है हमारा सिर्फ किसी भी धर्म का पक्षधर होना सही नहीं। अभी इस समय देश के हालात ऐसे नहीं कि हम सिर्फ नमाज़ अदा करने जैसे मुद्दों पर एक दूसरे पर सवाल-जवाब लादें। ऐसी स्थिति में शायद आप एक नागरिक होने का कर्त्तव्य निभाते तो वो भी नमाज़ से कम न होता। सही और ग़लत करने वाले हर धर्म में मौजूद हैं। लेकिन बड़ा वो है जो मानवता को अपना धर्म समझकर कर्त्तव्य पथ पर सदैव अग्रसर रहता है।
ध्यान से देखिएगा ये नेकी और पत्थर दोनों एक ही धर्म से हैं।तो ये तय है कि मज़हब कोई भी दुश्मनी करना नहीं सिखाता। ईश्वर ने तो हमें इंसान बनाकर भेजा है मज़हबी तो हम धरती पर आकर हुए इसलिए हमारा पहला धर्म मानवता है। और जब ये संसार छोड़कर जाएंगे तो ईश्वर आपसे धर्म नहीं आपका कर्म और कर्तव्य के आधार पर आपको आकेंगे।
सलाम रजिया बेगम मंसूरी जी जैसी वीरांगनाओं को।🙏
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