पशुओं के साथ क्रूरता की बहुत ही दुखद घटना आज मानवता को शर्मसार कर रही है।यह घटना केरल जहां की साक्षरता 93.31% हैं वहां के मलप्पुरम की है। यह घटना बीते बुधवार यानि कि 24 मई की है। एक हथिनी भोजन की तलाश में घूम रही थी । और जगंल के रास्ते से भटक कर वो एक गांव में पहुंच गई। गांव में आने के बाद भी उसने किसी को कोई हानि नहीं पहुंचाई थी। कुछ शरारती या ये कहो कि असामाजिक तत्त्वों ने उस गर्भवती हथिनी को अनानास(Pineapple Cracker) खिला दिया। थोड़ी ही देर में अनानास (Pineapple Cracker ) हथिनी के पेट में जाकर फट गया और हथिनी गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक हथिनी के मुंह में पटाखे
के घाव आ गए थे जिससे जीभ भी ज़ख्मी हो गई थी । दर्द के कारण कुछ खा नहीं पा रही
थी।उसके पेट में पल रहे बच्चे को भी कुछ नहीं मिल पा रहा था। खाने की तलाश में वह
वेल्लियार नदी तक पहुंच गई और नदी में मुंह डालकर खड़ी हो गई । हो सकता है उसे ऐसा
करने पर कुछ आराम महसूस हो रहा हो। जानकारी मिलते ही वन अधिकारी रेस्क्यू करने
पहुंचे तो बहुत मुश्किल से उसे पानी से निकाला गया। ऐसे में उसने तड़प-तड़पकर 27
मई दिन शनिवार दोपहर 4 बजे पानी में खड़े-खड़े दम तोड़ दिया।
वन अधिकारी जिन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट शेयर की और लिखा-
"उसने सभी पर भरोसा किया । जब वह अनानास खा गई और कुछ देर बाद उसके पेट में यह फट गया तो वह परेशान हो गई। हथिनी अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चे के लिए परेशान हुई होगी , जिसे वह अगले 18 से 20 महीने में जन्म देने वाली थी।"
उसे ट्रक से वन ले जाया गया और अधिकारियों ने अंतिम विदाई दी। अधिकारियों ने कहा कि वो ऐसी विदाई की हकदार थीं जहां खेलकर बड़ी हुई उसी जगह उसे विदाई देना जरूरी था।
जिस डॉक्टर के
द्वारा उसका पोस्टमार्टम किया गया उन्होंने बताया कि वो अकेली नहीं थी हमने वहां
उसका एक चिता पर अंतिम संस्कार किया। हम उसके सामने नतमस्तक हो गए और अपना अंतिम
सम्मान दिया।
इस क्रूर घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया में वन विभाग के अधिकारी द्वारा दुख के साथ पोस्ट की गईं। सोशल मीडिया में आते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। और लोग कार्यवाही की मांग करने लगे। पहले ही पशुओं के प्रति क्रूरता का अंजाम कोरोना के रूप में विश्व में छाया हुआ है। भारत में हाथियों की संख्या आंकड़ों के आधार पर 20000 से 25000 के बीच है। भारतीय हाथियों को विलुप्तप्राय जाति के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। आखिरकार एक शाकाहारी जीव मानव जाति का कुछ बिगाड़ भी नहीं रहा है फिर भी ऐसा दुर्व्यवहार समस्त मानवजाति को शर्मिंदा कर देता है।



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