A small thanx to those from my side.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
आत्मचिंतन (मन की बात )
बेटी मेरा अभिमान को लेकर कुछ पंक्तियां गुन रही थी । हर दिन एक नया मोड़ देने की लालसा में दिन रात जग रही थी। पिरो ली थी जब मैंने लिखने की वो...
-
नज़ारा स्वच्छ नदी का । लुभाता मन सभी का । तट बैठूं मैं इसके , मिलता सुकूं सदी का। हिमालय की नदियां, हैं बारहमासी । बने भगवान खुद ...
-
बेटी मेरा अभिमान को लेकर कुछ पंक्तियां गुन रही थी । हर दिन एक नया मोड़ देने की लालसा में दिन रात जग रही थी। पिरो ली थी जब मैंने लिखने की वो...
-
कोरोना ने बहुत कुछ छीना और आज भी हम लोकडाउन से जूझ रहे हैं । न जाने कितने गरीब श्रमिकों की मौत हुई और न जाने कितने परिवारों ने खोया अपनों को...
No comments:
Post a Comment