अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है तो दिया जलाना है

प्रधानमंत्री जी का संदेश आज पालन करने का दिन आ गया है। जहां कुछ मूर्ख लोग जमकर मजाक बना रहे हैं बिना सत्यता जाने । उनकी मूर्खता को चुनौती देते हुए कहना चाहती हूं हम तो दिए जलाएंगे।
ॐ असतो मा सद्गमय,
तमसो मा ज्योतिर्गमय,
मॄत्योर्मा अमॄतं गमय।


और देश का हर एक नागरिक दिया जलाएगा ।
जैसे आपने 22 मार्च को एक साथ कर्मवीरों का आभार व्यक्त करके एकता का प्रमाण दिया था। उसी प्रकार 5 अप्रैल दिन रविवार रात 9 बजे ,9मिनट के लिए लाइट बंद करके; मोमबत्ती, दिया या फ्लैस लाइट से खिड़की पर या दरवाजे पर खड़े होकर प्रकाश फैलाना है और इस महामारी से लड़कर इसे भगाना है।


सोशल डिस्टेंसिंग़ की लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करना है।



हम सब को ये करके दिखाना है कि हम सब एक साथ हैं।

कुछ पल अकेले में मां भारती का ध्यान करें और 130 करोड़ की आबादी के चेहरे का स्मरण करें।इस आयोजन में इकट्ठा नहीं होना है। कोई भी लक्ष्य‌ नामुमकिन नहीं।

पोजिटिविटी का प्रतीक है रोशनी। मुश्किल घड़ी में भी पोजिटिव रह पाना आसान काम नहीं। स्वीकार करेंगे अगर आप उनका अनुरोध शायद खुद में एक नया जोश पाएंगें।

याद रहे कि सेनेटाइजर यूज करके दिया न जलाएं उसमें एल्कोहल होता है आप जल सकते हैं।कोई भी कार्य उचित सावधानी के साथ करें। कृपया सावधानी बरतें।



जय हिंद।।🇮


5 comments:

आत्मचिंतन (मन की बात )

 बेटी मेरा अभिमान को लेकर कुछ पंक्तियां गुन रही थी । हर दिन एक नया मोड़ देने की लालसा में दिन रात जग रही थी। पिरो ली थी जब मैंने लिखने की वो...